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छत्तीसगढ़ी भाषा का लेखन सभी विधाओं में होना है जरूरी

भारतीय भाषा संस्थान मैसूर के संयुक्त तत्वावधान में छत्तीसगढ़ी भाषा शोध संगोष्ठी हुई।

तुलसी साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ इकाई बिलासपुर व भारतीय भाषा संस्थान मैसूर के संयुक्त तत्वावधान में छत्तीसगढ़ी भाषा शोध संगोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि छग राजभाषा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक, अध्यक्षता डॉ. अरूण कुमार यदु ने किया। भारतीय भाषा संस्थान मैसूर के समन्वयक डॉ. सत्येन्द्र अवस्थी, ओपन यूनिवर्सिटी की हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. जयपाल प्रजापति, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विनोद कुमार वर्मा, तुलसी साहित्य अकादमी के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे रहे।

डॉ. पाठक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी साहित्य सृजन अत्यधिक हो रहा है। उन्होंने भारतीय भाषाओं की जानकारी व डेटा संग्रहण के अंतर्गत छत्तीसगढ़ी भाषा की जानकारी के लिए आए डॉ. अवस्थी व शोधार्थियों का स्वागत किया।

डॉ. विवेक तिवारी ने बताया कि बिलासपुर के साहित्यकारों ने मैसूर के लिए स्वयं की और अन्य साहित्यकारों की 54 कृतियां भेंट की हैं।

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